बिना चीरा-फाड़ी के सर्जरी: ग्वालियर में लैप्रोस्कोपी और लेज़र का कमाल

admin

Modern Laparoscopic Surgery Setup

ग्वालियर में आधुनिक सर्जरी: अब बड़े चीरों का डर हुआ खत्म।

बिना चीरा-फाड़ी के सर्जरी: ग्वालियर में लैप्रोस्कोपी और लेज़र का कमाल

पुराने समय में सर्जरी का नाम सुनते ही बड़े चीरे, खून की कमी और हफ्तों तक अस्पताल के बिस्तर पर पड़े रहने की तस्वीर आ जाती थी। लेकिन चिकित्सा विज्ञान की प्रगति ने अब इसे पूरी तरह बदल दिया है। आज के दौर में “बिना चीरा-फाड़ी वाली सर्जरी” यानी लैप्रोस्कोपी और लेज़र तकनीक ने इलाज को इतना सरल बना दिया है कि मरीज कुछ ही घंटों में अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है。

ग्वालियर के सुप्रसिद्ध Laparoscopic and General Surgeon, डॉ. शुभम गुप्ता बताते हैं कि आधुनिक तकनीकों के आने से अब सर्जरी कोई डरावना अनुभव नहीं रह गई है। पित्त की पथरी (Gallbladder Stones), हर्निया, बवासीर (Piles) और अपेंडिक्स जैसी समस्याओं का समाधान अब न्यूनतम निशान और अधिकतम सुरक्षा के साथ संभव है。

क्या है लैप्रोस्कोपी और लेज़र तकनीक?

इन दोनों तकनीकों को चिकित्सा की भाषा में Minimally Invasive Surgery कहा जाता है।

1. लैप्रोस्कोपी (दूरबीन वाली सर्जरी):

इसमें सर्जन पेट पर बड़े कट लगाने के बजाय, पेन की नोक के बराबर (5-10 मिमी) के 2 या 3 छोटे छेद करते हैं। एक छेद के जरिए एक सूक्ष्म कैमरा (Laparoscope) अंदर डाला जाता है, जो शरीर के अंदरूनी अंगों की बड़ी तस्वीर स्क्रीन पर दिखाता है।

2. लेज़र तकनीक:

यह तकनीक विशेष रूप से पाइल्स, फिशर और फिस्टुला के लिए वरदान है। इसमें लेज़र फाइबर की ऊर्जा से प्रभावित हिस्से का सटीक इलाज किया जाता है, जिससे स्वस्थ ऊतकों को कोई नुकसान नहीं पहुँचता。

आधुनिक सर्जरी के 5 बड़े फायदे

ग्वालियर में मरीज इन आधुनिक तकनीकों को क्यों चुन रहे हैं? यहाँ इसके ठोस कारण दिए गए हैं:

  • न्यूनतम दर्द (Minimal Pain): बड़े चीरे न होने के कारण, ऑपरेशन के बाद होने वाला दर्द बहुत ही कम होता है।
  • जल्द रिकवरी (Quick Recovery): मरीज 24 से 48 घंटों में घर जा सकता है और कुछ ही दिनों में अपने काम पर लौट सकता है।
  • खून की कम कमी: छोटे कट का मतलब है कम रक्तस्राव और इन्फेक्शन का न्यूनतम खतरा।
  • बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम: सर्जरी के निशान इतने छोटे होते हैं कि वे समय के साथ लगभग अदृश्य हो जाते हैं।
  • अत्यधिक सटीकता (Precision): हाई-डेफिनिशन कैमरे की मदद से सर्जन बहुत अधिक सटीकता के साथ ऑपरेशन कर पाते हैं।

मिथक बनाम सच्चाई

मिथक: “अगर पेट पूरा नहीं खुलेगा, तो बीमारी जड़ से खत्म नहीं होगी।”
सच्चाई: लैप्रोस्कोपिक सर्जन कैमरे के जरिए उन हिस्सों को भी देख सकते हैं जो ओपन सर्जरी में देखना कठिन होता है। यह तकनीक न केवल सुरक्षित है, बल्कि अधिक प्रभावी भी है。

मरीज के लिए तैयारी का मार्गदर्शन

  • परामर्श: डॉक्टर आपकी समस्या के लिए अल्ट्रासाउंड या क्लिनिकल जांच करवाएंगे।
  • फिटनेस: सर्जरी से पहले ब्लड टेस्ट और ईसीजी (ECG) जैसी सामान्य जांचें अनिवार्य हैं।
  • उपवास: सर्जरी से कम से कम 6-8 घंटे पहले कुछ भी न खाएं-पिएं।
  • अनुवर्ती देखभाल: सर्जरी के अगले दिन से आप हल्का भोजन और चलना शुरू कर सकते हैं।

निष्कर्ष: डॉ. शुभम गुप्ता का लक्ष्य ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। यदि आप सर्जरी के नाम से डर रहे हैं, तो आधुनिक लैप्रोस्कोपी और लेज़र तकनीक आपके लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है。

बिना चीरा-फाड़ी वाले इलाज के लिए संपर्क करें

देरी न करें, स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। आज ही विशेषज्ञ परामर्श लें。

📞 कॉल करें: 86929 63804

🌐 www.drshubham.com
📍 True Health Polyclinic, अस्पताल रोड, पुरानी परिवार हॉस्पिटल के पास,
ललितपुर कॉलोनी, लश्कर, ग्वालियर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *