हर्निया का ऑपरेशन टालना पड़ सकता है भारी: जानिए 5 गंभीर जटिलताएं
क्या आपको पेट या जांघ के ऊपरी हिस्से (groin) में कोई असामान्य उभार या गांठ महसूस होती है, जो खांसने, झुकने या भारी सामान उठाने पर बढ़ जाती है और लेटने पर कम हो जाती है? अगर हाँ, तो यह हर्निया (Hernia) हो सकता है। अक्सर लोग हर्निया को एक मामूली सूजन समझकर या ऑपरेशन के डर से सालों-साल टालते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर्निया कभी भी दवाइयों या बेल्ट से खुद ठीक नहीं होता?
1. हर्निया क्या है और यह क्यों होता है?
सरल शब्दों में कहें तो हमारे पेट की दीवार मांसपेशियों की एक मजबूत परत से बनी होती है, जो अंदर के अंगों (जैसे आंतों) को अपनी जगह पर रोक कर रखती है। जब पेट की यह मांसपेशी किसी जगह से कमजोर हो जाती है या उसमें कोई छेद हो जाता है, तो अंदर की आंत या चर्बी उस कमजोर हिस्से को फाड़कर बाहर की तरफ निकलने लगती है। इसी उभार को हर्निया कहते हैं।
चूंकि यह एक शारीरिक या मैकेनिकल खराबी (defect) है, इसलिए इसे केवल Hernia Surgery (हर्निया ऑपरेशन) के जरिए ही ठीक किया जा सकता है, जिसमें कमजोर मांसपेशियों को सिलकर वहां एक विशेष जाली (Mesh) लगा दी जाती है।
2. हर्निया का ऑपरेशन टालने से होने वाली 5 गंभीर जटिलताएं
अगर आप दर्द की दवाइयां खाकर या हर्निया बेल्ट (Truss) लगाकर ऑपरेशन को टाल रहे हैं, तो आप अनजाने में इन पांच बड़े खतरों को बुलावा दे रहे हैं:
-
आकार का लगातार बढ़ना (Increase in Size)
हर्निया का छेद समय के साथ कभी छोटा नहीं होता, बल्कि पेट के आंतरिक दबाव (जैसे कब्ज, खांसी या वजन उठाने) के कारण यह लगातार बढ़ता जाता है। हर्निया जितना बड़ा होगा, बाद में उसकी सर्जरी उतनी ही जटिल हो जाती है।
-
इरेड्यूसिबल हर्निया (Irreducible Hernia)
शुरुआती दिनों में बाहर निकला हुआ अंग लेटने या हल्के हाथ से दबाने पर पेट के अंदर वापस चला जाता है। लेकिन धीरे-धीरे वह अंग उस छेद में इस तरह चिपक जाता है कि वह वापस अंदर नहीं जा पाता। इसे इरेड्यूसिबल हर्निया कहते हैं, जिसमें लगातार मीठा-मीठा दर्द बना रहता है।
-
इनकार्सरेशन या आंत का फंस जाना (Incarceration)
यह एक बेहद खतरनाक स्थिति है। जब पेट की आंत का एक हिस्सा हर्निया के छेद में बाहर आकर बुरी तरह फंस जाता है और वापस अंदर नहीं जा पाता, तो उसे इनकार्सरेशन कहते हैं। इसके कारण मरीज को तेज दर्द, उल्टी, पेट फूलना और गैस पास न होने जैसी गंभीर समस्याएं होने लगती हैं।
-
स्ट्रैंगुलेशन: आंत का सड़ जाना (Strangulated Hernia)
जब फंसी हुई आंत को तुरंत बाहर नहीं निकाला जाता, तो उस हिस्से में खून की सप्लाई (Blood circulation) पूरी तरह बंद हो जाती है। खून न मिलने के कारण वह आंत चंद घंटों में सड़ने (Gangrene) लगती है। यह एक अत्यंत गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें मरीज की जान बचाने के लिए तुरंत इमरजेंसी ऑपरेशन करना पड़ता है।
-
पेट में गंभीर इन्फेक्शन (Peritonitis)
यदि स्ट्रैंगुलेशन के कारण आंत पेट के अंदर ही फट जाए, तो आंत का सारा मल और इन्फेक्शन पूरे पेट में फैल जाता है। इससे शरीर के कई अंग काम करना बंद कर सकते हैं।
3. लैप्रोस्कोपिक सर्जरी: हर्निया का आधुनिक और दर्दरहित इलाज
कई मरीज सिर्फ इस डर से ऑपरेशन नहीं कराते कि उन्हें हफ्तों तक बिस्तर पर रहना पड़ेगा और बड़ा चीरा लगेगा। लेकिन ग्वालियर में General Surgeon डॉ. शुभम गुप्ता इस प्रक्रिया को आधुनिक Minimally Invasive (कम से कम चीरे वाली) यानी लैप्रोस्कोपिक विधि से करते हैं।
न्यूनतम दर्द (Minimal Pain)
त्वरित रिकवरी (Quick Recovery)
सटीकता और मजबूती (Precision)
1-2 दिन में Discharge
आयुष्मान भारत कार्ड धारकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना
सरकारी नियमों के अनुसार, आयुष्मान कार्ड केवल अपेंडिक्स (Appendix) और पित्त की थैली (Gallbladder) के इलाज के लिए ही पूरी तरह से लागू और मान्य है। हर्निया के इलाज में आयुष्मान कार्ड लागू नहीं होता है। हालांकि, डॉ. शुभम गुप्ता के क्लिनिक पर बेहद किफायती दरों पर हर्निया की विश्वस्तरीय दूरबीन सर्जरी उपलब्ध है।
4. पेशेंट गाइड: हर्निया सर्जरी से पहले और बाद में क्या ध्यान रखें?
सर्जरी से पहले की तैयारी:
- डॉक्टर आपकी मांसपेशियों की स्थिति और हर्निया के प्रकार को समझने के लिए पेट का एक अल्ट्रासाउंड (USG) या सीटी स्कैन करवा सकते हैं।
- यदि आपको पुरानी खांसी, कब्ज या पेशाब में रुकावट है, तो सर्जरी से पहले उसका इलाज जरूरी है ताकि टांकों पर दबाव न पड़े।
सर्जरी के बाद की सावधानियां:
- ऑपरेशन के बाद शुरुआती 4 से 6 हफ्तों तक भारी वजन उठाने, जिम जाने या कठिन शारीरिक श्रम करने से पूरी तरह बचें।
- अपने भोजन में हरी सब्जियां, फल और फाइबर युक्त चीजें शामिल करें ताकि कब्ज की समस्या न हो और पेट पर जोर न पड़े।
हर्निया को नजरअंदाज करना या उसे किसी बेल्ट के सहारे दबाकर रखना किसी बड़ी मुसीबत को निमंत्रण देने जैसा है। प्लान्ड (सोच-समझकर कराए गए) ऑपरेशन की तुलना में इमरजेंसी में किया गया ऑपरेशन हमेशा अधिक जटिल होता है।
आज ही डॉ. शुभम गुप्ता से परामर्श लें
यदि आपको हर्निया के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो घबराएं नहीं — आज ही संपर्क करें।
True Health Polyclinic, Hospital Rd, Near Old Parivaar Hospital, Lalitpur Colony, Lashkar, Gwalior