एनल फिशर बार-बार क्यों होता है? वो 5 गलतियां जो इसे क्रॉनिक बनाती हैं

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एनल फिशर बार-बार क्यों होता है? वो 5 गलतियां जो इसे क्रॉनिक बनाती हैं

शौच के दौरान कांच चुभने जैसा असहनीय दर्द, घंटों तक रहने वाली तीव्र जलन और टॉयलेट पेपर या स्टूल पर चमकीले लाल रंग की खून की लकीर दिखना — ये एनल फिशर (Anal Fissure) के सीधे लक्षण हैं। कई बार मरीज दवाइयों या क्रीम की मदद से शुरुआती दर्द को दबा देते हैं और आराम मिलते ही यह सोचकर बेफिक्र हो जाते हैं कि बीमारी खत्म हो गई। लेकिन कुछ ही दिनों में जैसे ही थोड़ा कड़ा मल आता है, यह दर्दनाक कट दोबारा हरा हो जाता है।

ग्वालियर (Gwalior) के जाने-माने Laparoscopic and General Surgeon डॉ. शुभम गुप्ता के अनुसार, एनल फिशर का बार-बार होना और ठीक न होना आपकी कुछ अनजानी गलतियों का नतीजा होता है। जब यह कट समय पर नहीं भरता, तो यह ‘क्रॉनिक’ (पुरानी और जिद्दी बीमारी) का रूप ले लेता है।

1. एनल फिशर क्या है और यह बार-बार क्यों लौटता है?

सरल शब्दों में, मलद्वार (Anus) के अंदरूनी हिस्से की नाजुक त्वचा पर लगने वाले चीरे या कट को एनल फिशर कहते हैं। ऐसा तब होता है जब पाचन क्रिया बिगड़ने के कारण मल बहुत कड़ा और सूखा हो जाता है।

जब आपको पहली बार फिशर होता है, तो मलद्वार की मांसपेशी (Sphincter) अत्यधिक दर्द के कारण सिकुड़ जाती है। इस खिंचाव की वजह से उस कटे हुए हिस्से में खून का दौरा (Blood supply) कम हो जाता है। खून की कमी के कारण घाव को भरने के लिए जरूरी पोषण नहीं मिल पाता और वह कट बार-बार छिलने लगता है। यही चक्र फिशर को बार-बार वापस लाता है।

2. वो 5 गलतियां जो फिशर को ‘क्रॉनिक’ (Chronic) बना देती हैं

  1. सिर्फ ऑइंटमेंट और पेनकिलर के भरोसे बैठना

    मरीजों की सबसे आम गलती यह है कि वे बिना डॉक्टरी सलाह के मेडिकल स्टोर से दर्द निवारक दवाइयाँ (Painkillers) या कोई भी ट्यूब लाकर लगाने लगते हैं। यह दवाइयाँ सिर्फ कुछ समय के लिए दर्द को सुन्न करती हैं, फिशर के असली कारण यानी आंतरिक मांसपेशियों के कड़ेपन को ठीक नहीं करतीं।

  2. पानी कम पीना और डाइट में फाइबर की कमी

    यदि आपका घाव थोड़ा भर भी रहा है, लेकिन आप पर्याप्त पानी (कम से कम 3-4 लीटर) नहीं पी रहे हैं या फास्ट फूड और मैदे से बनी चीजें खा रहे हैं, तो मल फिर से कड़ा हो जाएगा। एक बार कड़ा मल आने का मतलब है घाव का दोबारा पूरी तरह से खुल जाना।

  3. टॉयलेट सीट पर लंबे समय तक बैठना और जोर लगाना

    आजकल बहुत से लोगों की आदत होती है कि वे कमोड पर मोबाइल लेकर बैठते हैं। टॉयलेट सीट पर 5 मिनट से ज्यादा बैठने से मलद्वार के आसपास की नसों और मांसपेशियों पर लगातार दबाव बनता है, जिससे फिशर का घाव कभी ठीक नहीं हो पाता।

  4. दर्द के डर से मोशन (शौच) को टालना

    फिशर के मरीजों को शौच के समय इतना भयंकर दर्द होता है कि वे डर के मारे खाना कम कर देते हैं या मोशन जाने को टालते हैं। मोशन रोकने से वह पेट के अंदर और ज्यादा कड़ा व सूखा हो जाता है, जिससे अगली बार जाते समय घाव और गहरा हो जाता है।

  5. कब्ज की दवाइयों (Laxatives) की आदत डालना

    शुरुआत में पेट साफ करने वाले चूर्ण या दवाइयाँ मदद कर सकती हैं, लेकिन लंबे समय तक इनका अंधाधुंध इस्तेमाल आंतों की स्वाभाविक कार्यप्रणाली को धीमा कर देता है, जिससे क्रॉनिक कब्ज की समस्या पैदा होती है।

3. लेजर ट्रीटमेंट: बार-बार होने वाले फिशर का स्थायी समाधान

जब फिशर क्रॉनिक स्टेज में पहुंच जाता है, तो वहाँ की त्वचा पर एक अतिरिक्त मस्सा बन जाता है, जिसे ‘सेंटीनल टैग’ कहते हैं। इस स्थिति में केवल दवाइयाँ काम नहीं करतीं। अनुभवी General Surgeon डॉ. शुभम गुप्ता के अनुसार, ऐसे मामलों में Minimally Invasive यानी लेजर प्रक्रिया (Laser Sphincterotomy) ही सर्वोत्तम और आधुनिक समाधान है।

अत्यधिक सटीकता (Precision)

कोई बड़ा कट या टांका नहीं (Minimal Pain)

तुरंत रिकवरी (Quick Recovery)

24 घंटे में Discharge

आयुष्मान भारत कार्ड धारकों के लिए विशेष जानकारी

सरकारी नियमों के अनुसार, आयुष्मान कार्ड केवल अपेंडिक्स (Appendix) और पित्त की थैली (Gallbladder) के इलाज के लिए ही पूरी तरह लागू और मान्य है। एनल फिशर, बवासीर या फिस्टुला के इलाज में आयुष्मान योजना लागू नहीं होती है। हालांकि, डॉ. शुभम गुप्ता के क्लिनिक पर बेहद किफायती और पारदर्शी दरों पर एडवांस लेजर ट्रीटमेंट उपलब्ध है।

4. पेशेंट गाइड: फिशर को क्रॉनिक होने से कैसे बचाएं?

  • सिट्ज़ बाथ (Sitz Bath) लें: दिन में कम से कम 2 से 3 बार एक टब में गुनगुना पानी भरकर उसमें 10-15 मिनट बैठें। यह मलद्वार की मांसपेशियों के कड़ेपन को कम करता है और दर्द में तुरंत राहत देता है।
  • हाई-फाइबर डाइट: अपने भोजन में पपीता, केला, सेब, हरी पत्तेदार सब्जियां और चोकरयुक्त आटे की रोटी को शामिल करें ताकि स्टूल हमेशा सॉफ्ट (नरम) रहे।
  • देरी न करें: यदि दर्द दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहता है, तो समझ जाएं कि यह साधारण कट नहीं है और तुरंत किसी विशेषज्ञ सर्जन से जांच करवाएं।
याद रखें: फिशर का दर्द किसी भी व्यक्ति की दैनिक दिनचर्या और मानसिक शांति को छीन सकता है। इसे घरेलू नुस्खों या गलत आदतों से क्रॉनिक बनाकर अपनी तकलीफ को बढ़ाना समझदारी नहीं है।
निष्कर्ष: दर्द को न सहें, सही समय पर सही परामर्श लें

ग्वालियर (Gwalior) और आसपास के क्षेत्रों में मरीजों को अत्याधुनिक, दर्दरहित और विश्वसनीय शल्य चिकित्सा सेवाएं देने के लिए Dr. Shubham Gupta (Expert Laparoscopic Surgeon) एक बेहद प्रतिष्ठित नाम हैं। यदि आप भी बार-बार होने वाले इस असहनीय दर्द से परेशान हैं, तो संकोच और लोक-लाज को छोड़ें।

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