बवासीर, फिशर और फिस्टुला में अंतर: खुद डॉक्टर न बनें, जानें सही इलाज

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बवासीर, फिशर और फिस्टुला में अंतर: खुद डॉक्टर न बनें, जानें सही इलाज

गुदा मार्ग (Anus) से जुड़ी किसी भी समस्या जैसे — दर्द, खुजली या ब्लीडिंग होने पर अक्सर लोग मान लेते हैं कि उन्हें बवासीर (Piles) ही है। लोक-लाज और संकोच के कारण मरीज खुलकर अपनी बात नहीं कह पाते और मेडिकल स्टोर से कोई भी रैंडम क्रीम या दवा लाकर खुद ही इलाज (Self-Diagnosis) करने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मलद्वार की ये तीनों बीमारियां — बवासीर, फिशर और फिस्टुला — एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं?

ग्वालियर (Gwalior) के वरिष्ठ Laparoscopic and General Surgeon डॉ. शुभम गुप्ता के अनुसार, बिना जांच किए खुद को बवासीर का मरीज मान लेना बेहद खतरनाक हो सकता है। क्योंकि जो दवा फिशर के लिए है, वह फिस्टुला पर कभी असर नहीं करेगी।

1. बवासीर, फिशर और फिस्टुला: आखिर अंतर क्या है?

बवासीर (Piles / Hemorrhoids)

यह क्या है: गुदा मार्ग के अंदर और बाहर की रक्त वाहिकाएं (Nerves) जब पुरानी कब्ज या अत्यधिक जोर लगाने के कारण सूज जाती हैं, तो वे मसों का रूप ले लेती हैं।

  • मुख्य लक्षण: शौच के दौरान बिना दर्द के अचानक लाल खून टपकना या मसों का बाहर आना।
फिशर (Anal Fissure)

यह क्या है: जब बहुत कड़ा (Hard) मल निकलता है, तो मलद्वार की नाजुक अंदरूनी त्वचा छिल जाती है या उसमें एक कट/दरार लग जाती है। इसे फिशर कहते हैं।

  • मुख्य लक्षण: शौच के दौरान और उसके कई घंटों बाद तक कांच चुभने जैसा असहनीय दर्द और जलन होना। इसमें खून की कुछ बूंदें या लकीर दिखाई दे सकती है।
फिस्टुला (Anal Fistula / भगंदर)

यह क्या है: यह इन तीनों में सबसे जटिल समस्या है। मलद्वार के अंदर छोटी-छोटी ग्रंथियां होती हैं। जब उनमें इन्फेक्शन के कारण मवाद (Pus) भर जाता है, तो वह मवाद बाहर निकलने के लिए एक सुरंग या रास्ता बना लेता है।

  • मुख्य लक्षण: मलद्वार के आसपास एक फुंसी होना, जिससे लगातार बदबूदार मवाद या खून रिसना।

2. आधुनिक लेजर सर्जरी: तीनों समस्याओं का सटीक समाधान

अनुभवी General Surgeon डॉ. शुभम गुप्ता इन तीनों विकारों के लिए एडवांस लेजर और दूरबीन तकनीकों का उपयोग करते हैं।

बेजोड़ सटीकता (Precision)

Minimal Pain — न्यूनतम दर्द

त्वरित रिकवरी (Quick Recovery)

24 घंटे में Discharge

आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए विशेष गाइडलाइन

सरकारी नियमों के अनुसार, आयुष्मान कार्ड केवल अपेंडिक्स (Appendix) और पित्त की थैली (Gallbladder) के इलाज के लिए पूरी तरह लागू और मान्य है। बवासीर, फिशर या फिस्टुला जैसी समस्याओं के इलाज में आयुष्मान योजना मान्य नहीं होती है। हालांकि, डॉ. शुभम गुप्ता के केंद्र पर बेहद वाजिब और किफायती दरों पर एडवांस लेजर ट्रीटमेंट उपलब्ध कराया जाता है।

3. पेशेंट गाइड: डॉक्टर के पास जाने से पहले और बाद की तैयारी

जांच और निदान (Diagnosis):

  • शर्माएं नहीं: डॉक्टर Clinical Examination (Digital Rectal Examination या Proctoscopy) के जरिए देखते हैं कि समस्या बवासीर है, फिशर है या फिस्टुला। फिस्टुला के मामलों में सुरंग का सही रास्ता जानने के लिए कभी-कभी MRI स्कैन की सलाह भी दी जाती है।
  • तैयारी: जांच या प्रक्रिया से पहले डॉक्टर पेट साफ करने के लिए कुछ दवाइयां या एनिमा दे सकते हैं।

पोस्ट-ऑपरेटिव केयर टिप्स (सर्जरी के बाद):

  • फाइबर युक्त डाइट: हरी सब्जियां, फल और भरपूर पानी पीएं ताकि कब्ज न हो।
  • सिट्ज़ बाथ (Sitz Bath): गुनगुने पानी के टब में दिन में दो से तीन बार बैठना गुदा मार्ग की मांसपेशियों को राहत देता है और रिकवरी को तेज करता है।
निष्कर्ष: खुद इलाज करने की भूल न करें, एक्सपर्ट से मिलें

बवासीर, फिशर और फिस्टुला की शुरुआती स्टेज को दवा और लाइफस्टाइल से संभाला जा सकता है, लेकिन गंभीर स्टेज में देरी करना इन्फेक्शन को पूरे शरीर में फैला सकता है। इंटरनेट या मेडिकल स्टोर के भरोसे रहकर खुद अपना डॉक्टर बनना आपकी तकलीफ को कई गुना बढ़ा सकता है।

संकोच छोड़ें — आज ही डॉ. शुभम गुप्ता से परामर्श लें

यदि आपको भी गुदा मार्ग में दर्द, सूजन, मवाद या ब्लीडिंग जैसी कोई भी शिकायत है, तो देर न करें।

86929 63804    www.drshubham.com

True Health Polyclinic, Hospital Rd, Near Old Parivaar Hospital, Lalitpur Colony, Lashkar, Gwalior

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